किताब -ए-जिन्दगी से मुझे मिटा न पाओगे ..

राजस्थान की बी जे पी सरकार. कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की पाठ्य पुस्तक. भारत का प्रथम राष्ट्रपति कौन ? देशरत्न डा.राजेन्द्र प्रसाद. देश के प्रथम प्रधान मंत्री के नाम पर पाठ्य पुस्तक मौन क्यों ? इसके पूर्व कांग्रेस के दौर में लिखा था -बैरिस्टर बनने के बाद उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था. बाद में कांग्रेस अध्यक्ष बने. आजादी के बाद वे आजाद भारत के प्रथम प्रधान मंत्री बने. क्या ये बातें झूठी थीं. अगर नहीं तो इन्हें हटाने का क्या औचित्य था. 11 बार जेल गये और 17 साल प्रधानमंत्री रहे नेहरू का नाम पाठ्य पुस्तक से निकालने का तो यही मतलब निकलता है कि सरकार नये सिरे से इतिहास लिखना चाहती है. क्या बच्चों को यह जानने का हक नहीं है कि उनके देश का प्रथम प्रधान मंत्री कौन था? आश्चर्य का विषय है कि पाठ्य पुस्तक में योजना आयोग का जिक्र तो है, पर उसके संस्थापक नेहरू का नाम नहीं है.
अभी पिछली बार दिल्ली में भारत अफ्रीकी सम्मेलन हुआ था. इस सम्मेलन में नरेन्द्र मोदी ने नेहरू का जिक्र तक नहीं किया. भला हो अफ्रीकी नेताओं का जिन्होंने भारत अफ्रीकी सम्बन्धों में नेहरू के योगदान को खुले दिल से स्वीकार किया और उसकी भूरी भूरी प्रशंसा की.
पंडित जवाहर लाल नेहरू भारत के पहले प्रधान मंत्री ही नहीं थे, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माता भी थे,जिनका आजाद भारत के शुरूआती दौर के लोकतांत्रिक व धर्म निरपेक्ष व्यवस्था कायम करने में अहम योगदान है. नेहरू ने पूरे देश में पंचायती राज्य की नींव रख कर विकास की नई ऊंचाइयों को छुआ था. आज राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, तकनीक
जैसे तमाम क्षेत्रों में जिन भारतीय संस्थानों की प्रतिष्ठा है, वे नेहरू के समय बने थे. क्या भाखड़ा व रिहन्द बांध बनाने का श्रेय किसी और को दिया जा सकता है? उनकी बनाई हुई विदेश नीति आज भी जस की तस है.सरकारें बदलीं,पर नीति में रत्ती भर फर्क नहीं हुआ .परन्तु यहां श्रेय देने को कौन कहे, नेहरू का नाम हीं गायब कर दिया गया है. इतिहास से छेड़छाड़ करने वाले खुद इतिहास बनते देखे गये हैं.
नेहरू को बी जे पी पाठ्य पुस्तक से निकाल सकती है, पर नेहरू तो हमारी जिन्दगी की किताब के हर वरक (पन्ने) पर हैं. उसे कैसे निकालेगी.
किताब -ए-जिन्दगी से मुझे मिटा न पाओगे,
वरक वरक पे मेरा इक्तिवास रहता है.
Image may contain: 1 person

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ये नयन डरे डरे,,

आजानुबाहु

ब्रिटिश राजघराने की रवायतें अभी नहीं बदली हैं ।