हमने भी एक छोटा सा ताजमहल बनाया ..
फैजुल हसन कादरी व तजमुली बेगम निःसंतान दम्पति थे. बेगम हमेशा चिन्तित रहतीं थीं कि उनके बाद उन्हें कौन याद करेगा ? एक दिन कादरी साहब ने उन्हें दिलासा दिया कि यदि उनके रहते रहते बेगम की मौत हो जाती है तो वह उनके लिए एक ताजमहल बनाएंगे, जो कि सदियों तक उनकी याद जहां में बरकरार रखेगी. वही हुआ. बेगम पहले मरीं.
फैजुल हसन कादरी पोस्ट मास्टर थे.उन्होंने रिटायरमेंट के पैसों से आगरा से करीब 100 किलोमीटर दूर अपने गांव में ताजमहल की अनुकृति तैयारी करवाई है ,जिसे देखने के लिए अब आस पास के गांव के लोग आने लगे हैं. कुल कीमत इस इमारत की 16/17 लाख होगी. इस काम में कादरी साहब ने एक पैसे की भी मदद किसी अन्य से नहीं ली, कारण वे नहीं चाहते थे कि इतिहास में यह कब्र चन्दे से बनी हुई दर्ज की जाय.
जब यह इमारत बनी उस समय कादरी साहब की उम्र गालिबन 75/76 की होगी. अब इसे बने 4/5 साल हो गये हैं. पता नहीं कादरी साहब जिन्दा हैं या मर गये हैं, पर उन्होंने यह इमारत बनाकर तजमुली बेगम के साथ साथ अपने को भी अमर बना दिया है. उम्मीद करता हूं कि बेगम साहिबा ने जन्नत से इस प्यार भरे यादगार को देखा होगा और अपने वादाकश शौहर का बार बार शुक्रिया अदा की होगी.
हमने भी एक छोटा सा ताज बनाया.
जिसमें केवल वफा का रेत मिलाया.

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